-:सूर्य मंदिर कन्दाहा:- (एक संक्षिप्त परिचय ) मिथिलान्तार्गत कोशी एवं धर्ममूला नदी के बीच अवस्थित एक छोटा सा गाँव कन्दाहा की पुण्यमयी धराधाम धराधाम में अवस्थित संपूर्ण विश्व की अद्वितीय सुर्यमूर्ती जो कि द्वापर युगीन है, की एक अनोखी गाथा है | सर्वप्रथम इस प्राचीन धरोहर को संजोकर रखनेवाला कन्दाहा गाँव का प्राचीन नाम कंदर्पदहा था, जिसका शाब्दिक अर्थ है- कंदर्प (कामदेव) का जहां दहन हुआ हो| पुराणों के अनुसार श्री शिवजी के द्वारा का...
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कन्दाहा का सूर्य मंदिर
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*भारत प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक विविधताओं वाला देश रहा है. इस संस्कृति के कुछेक पहलू अभी भी अच्छी तरह से ज्ञात नहीं है. इन्ही में से एक प्राचीन सूर्य मंदिर के रूप में सहरसा jeele के कन्दाहा गाँव में मौजूद है. कन्दाहा एक छोटा सा गाँव है जहाँ के लोगों का मुख्य पेशा मछली पकड़ना है. परन्तु इस गाँव को भारत के एक प्राचीनतम और अनुपम सूर्य मंदि र के swaamitv का gaurav प्राप्त है. इस अतुलनीय सूर्य मंदिर का निर्माण १४ वीं शताब्दी में मिथिला के राजा हरिसिंह देव ने किया था. यह सहरसा जिला मुख्यालय से लगभग १२ किलोमीटर पश्चिम में अवस्थित है . महाभारत और सूर्य पुराण के अनुसार इस सूर्य मंदिर का निर्माण 'द्वापर युग' में हो चुका था. पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान् कृष्ण के पुत्र 'शाम्ब' किसी त्वचा रोग से पीड़ित थे जो मात्र यहाँ के सूर्य कूप के जल से ठीक हो सकती थी. यह पवित्र सूर्य कूप अभी भी मंदिर के निकट अवस्थित है. इस के पवित्र जल से अभी भी त्वचा रोगों के ठीक होने की ब...
प्राचीन विरासत का जीवन्त प्रमाण सुर्य मन्दिर,कन्दाहा
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सुर्य मन्दिर,कन्दाहा , सहरसा , बिहार सूर्य मंदिर कंदाहा की संक्षिप्त गाथा कोशी प्रमंडलीय मुख्यालय सहरसा के महिषी प्रखंड अंतर्गत प्राचीन नाम कंचनपुर (कंदाहा) में मिथिला के ओइनवर (ओनिहरा) वंश के राजा हरिसिंह देव के द्वारा चौदहवीं शताब्दी में स्थापित किया गया था. मूर्ति के माथे के ऊपर मेष राशि का चित्र अंकित रहने की वजह से वैसे यह कहा जाता है की द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्भ के द्वारा स्थापित है. कंचनपुर को कभी सुजालगढ़ के नाम से भी जाना जाता था. काले पत्थर के सूर्य की अदभुत मूर्ति और चौखट पर उत्कृष्ट लिपि पर्यटकों व पुरातत्वविदों को अपनी ओर आकर्षित करती है. सुर्य मन्दिर सहरसा जि...